60questions, every one explained
10items in the 2022 paper drew on this chapter
Every one of the 60 items is written this way — the answer, and why each wrong option is wrong.
कारक (Case / विभक्ति)
A.1 परिभाषा और नियम
कारक = संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जिससे उसका क्रिया के साथ संबंध प्रकट हो। यह संबंध जिन चिह्नों (परसर्गों) से व्यक्त होता है, उन्हें विभक्ति-चिह्न या परसर्ग कहते हैं (ने, को, से, का, में, पर आदि)।
हिंदी में 8 कारक माने जाते हैं —
| क्र. |
कारक |
विभक्ति-चिह्न |
अर्थ/कार्य |
पहचान-प्रश्न |
| 1 |
कर्ता |
ने (या शून्य) |
क्रिया को करने वाला |
क्रिया कौन करता है? |
| 2 |
कर्म |
को (या शून्य) |
जिस पर क्रिया का फल पड़े |
क्या/किसे (क्रिया का फल)? |
| 3 |
करण |
से, के द्वारा |
जिस साधन से क्रिया हो |
किस साधन/माध्यम से? |
| 4 |
संप्रदान |
को, के लिए |
जिसके लिए क्रिया हो / जिसे कुछ दिया जाए |
किसके लिए? किसे दिया? |
| 5 |
अपादान |
से (अलगाव) |
जिससे कोई वस्तु अलग हो |
किससे अलग हुआ? |
| 6 |
संबंध |
का, की, के; रा, री, रे |
संज्ञा का संज्ञा से संबंध |
किसका/किसकी/किसके? |
| 7 |
अधिकरण |
में, पर |
क्रिया का स्थान/समय/आधार |
कहाँ? किसमें? किस पर? |
| 8 |
संबोधन |
हे! अरे! ओ! |
पुकारने/बुलाने का भाव |
किसे पुकारा गया? |
स्मरण-सूत्र (क्रम याद रखने हेतु): "कर्ता कर्म करण संप्रदान, अपादान संबंध अधिकरण संबोधन" — अथवा लोकप्रिय दोहा: "कर्ता ने अरु कर्म को, करण रीति से जान। संप्रदान को, के लिए, अपादान से मान॥ का, के, की संबंध हैं, अधिकरण में, पर मान। रे! हे! हो! संबोधन, मित्र धरहु यह ध्यान॥"
A.2 प्रत्येक कारक — संक्षिप्त टिप्पणी
- कर्ता (ने): 'ने' केवल सकर्मक क्रिया के भूतकाल (सामान्य/पूर्ण भूत आदि) में लगता है — राम ने खाना खाया। वर्तमान/भविष्य में शून्य चिह्न — राम खाना खाता है। अकर्मक क्रिया में 'ने' नहीं — वह हँसा (न कि "उसने हँसा")। अपवाद: खाँसना, छींकना, थूकना, नहाना अकर्मक होते हुए भी 'ने' लेती हैं — उसने छींका, उसने थूका।
- कर्म (को): सजीव/निश्चित कर्म के साथ 'को' — माँ ने बच्चे को जगाया; निर्जीव कर्म प्रायः बिना चिह्न — मैंने पुस्तक पढ़ी।
- करण (से/के द्वारा): क्रिया का साधन/उपकरण/माध्यम — वह कलम से लिखता है; पत्र डाक के द्वारा भेजा गया।
- संप्रदान (को/के लिए): देने के भाव में अथवा जिसके लिए क्रिया की जाए — गुरु ने शिष्य को ज्ञान दिया; माँ बच्चों के लिए फल लाई। (संप्रदान = सम्यक् प्रदान — भली-भाँति देना।)
- अपादान (से): अलगाव/पृथक्करण — पेड़ से पत्ता गिरा; गंगा हिमालय से निकलती है। इसके अतिरिक्त तुलना, भय, लज्जा, दूरी के अर्थ में भी अपादान — वह साँप से डरता है।
- संबंध (का/की/के): एक संज्ञा का दूसरी संज्ञा से लगाव — यह राधा की पुस्तक है; मेरा (मुझ+रा) घर। ध्यान दें: संबंध कारक का संबंध क्रिया से नहीं, दूसरी संज्ञा से होता है — इसीलिए कुछ वैयाकरण इसे "कारक" मानने में मतभेद रखते हैं; परीक्षा में इसे 8 कारकों में ही गिनें।
- अधिकरण (में/पर): क्रिया का आधार — स्थान, समय, अवसर — मेज पर पुस्तक है; कमरे में दीपक जल रहा है।
- संबोधन (हे/अरे/ओ): पुकार — हे प्रभु! रक्षा करो। लिखने में संबोधन के बाद विस्मयादिबोधक चिह्न (!) आता है।
A.3 दस उदाहरण-वाक्य (कारक-पहचान सहित)
| वाक्य |
रेखांकित पद |
कारक |
| राम ने रावण को मारा। |
ने / को |
कर्ता / कर्म |
| बच्चा छत से गिर पड़ा। |
से |
अपादान (अलगाव) |
| वह कलम से पत्र लिखता है। |
से |
करण (साधन) |
| सेठ ने भिखारी को कंबल दिया। |
को |
संप्रदान (देने का भाव) |
| शिक्षिका ने छात्र को बुलाया। |
को |
कर्म (फल छात्र पर) |
| यह सोने की अँगूठी है। |
की |
संबंध |
| मेज़ पर पुस्तकें रखी हैं। |
पर |
अधिकरण |
| हे ईश्वर! सबका भला करो। |
हे |
संबोधन |
| गरीबों के लिए वस्त्र लाओ। |
के लिए |
संप्रदान |
| वह बस से विद्यालय जाता है। |
से |
करण (माध्यम) |
A.4 दो प्रसिद्ध जाल (Traps)
जाल 1 — 'से' : करण या अपादान? दोनों का चिह्न 'से' है। कसौटी —
- साधन/उपकरण/माध्यम का बोध → करण (चाकू से फल काटा)।
- अलग होने/निकलने/गिरने/डरने का बोध → अपादान (घोड़े से गिरा; चोर से डरो)।
- वाक्य में "के द्वारा" रखकर देखें — अर्थ बना रहे तो करण; "से अलग होकर" रखने पर अर्थ बने तो अपादान।
जाल 2 — 'को' : कर्म या संप्रदान? दोनों का चिह्न 'को' है। कसौटी —
- क्रिया का फल सीधे जिस पर पड़े → कर्म (माँ ने बच्चे को सुलाया)।
- देने का भाव हो, या 'को' के स्थान पर 'के लिए' रखने से अर्थ बना रहे → संप्रदान (राजा ने ब्राह्मण को दान दिया = ब्राह्मण के लिए)।
परीक्षक की दृष्टि: प्रश्न प्रायः इसी रूप में आता है — "निम्न वाक्य में 'से' किस कारक का चिह्न है?" और विकल्पों में करण तथा अपादान दोनों रखे जाते हैं। पहले क्रिया देखें: गिरना, निकलना, डरना, अलग होना → अपादान; लिखना, काटना, जाना (साधन से) → करण। इसी तरह 'को' वाले प्रश्न में "देना/लाना/भेजना (किसी के लिए)" दिखे तो संप्रदान चुनें।