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Principal Sarathi VP & Principal 2026

Practice Set 8 — सामान्य हिंदी

150 practice questions on सामान्य हिंदी for the UPSC Combined Recruitment Test for Vice Principal and Principal, Directorate of Education, Delhi. Answers show as you go, so this is drilling rather than a timed paper.

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सामान्य हिंदी150

Three questions from this set, solved

Q70

नीचे दिए गए वाक्यों पर विचार कीजिए : I. उसने मुझे एक सोने की अँगूठी भेंट की। II. ज्यों-ज्यों परीक्षा निकट आई, वैसे-वैसे उसकी चिंता बढ़ती गई। III. वह न केवल कुशल अध्यापक है, अपितु अच्छा लेखक भी है। IV. शृंगार रस को रसराज कहा जाता है। इनमें से कौन-से वाक्य शुद्ध हैं?

  1. (a) केवल III और IV
  2. (b) केवल I और II
  3. (c) केवल II और III
  4. (d) I, II, III और IV
Answer (a).

उत्तर (a) — केवल III और IV। वाक्य III में नित्य-संबंधी युग्म 'न केवल … अपितु … भी' पूरा और सही है (ch11, भाग Q.5)। वाक्य IV सही तथ्य है — शृंगार को रसराज कहा जाता है (ch11, भाग L.2; हिंदी शब्दसागर — रसराज: रसों का राजा, शृंगार रस)। वाक्य I में पदक्रम-दोष है — 'एक' संख्या 'अँगूठी' की है, 'सोने' की नहीं, इसलिए उसे 'अँगूठी' के ठीक पहले आना चाहिए: "उसने मुझे सोने की एक अँगूठी भेंट की" (ch11, भाग K.1, प्रकार 8)। वाक्य II में युग्म बेमेल है — 'ज्यों-ज्यों' का जोड़ीदार 'त्यों-त्यों' है और 'जैसे-जैसे' का 'वैसे-वैसे' (कामताप्रसाद गुरु, हिंदी व्याकरण, अंक ७१३ के उदाहरण: "ज्यों-ज्यों भीजे कामरी, त्यों-त्यों भारी होय"; "जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती है वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ता जाता है"); ch11, भाग Q.5 में 'ज्यों-ज्यों … वैसे-वैसे' ठीक इसी अशुद्धि के रूप में दिया गया है। शुद्ध: "ज्यों-ज्यों परीक्षा निकट आई, त्यों-त्यों उसकी चिंता बढ़ती गई"। (b) दोनों दोषपूर्ण वाक्यों को शुद्ध और दोनों शुद्ध वाक्यों को अशुद्ध मान लेता है — उलटा निर्णय। (c) बेमेल युग्म वाले II को शुद्ध मानता है और सही तथ्य वाले IV को छोड़ देता है। (d) पदक्रम और युग्म — दोनों दोषों को अनदेखा कर देता है।

Q97

निम्नलिखित शब्दों और उनके संधि-विच्छेद पर विचार कीजिए :

शब्द संधि-विच्छेद
I. तपोभूमि तपः + भूमि
II. अत्यंत अत्य + अंत
III. अतएव अतः + एव
IV. महेंद्र मही + इंद्र

इनमें से कौन-से संधि-विच्छेद शुद्ध हैं?

  1. (a) केवल I और II
  2. (b) केवल II और IV
  3. (c) केवल I और III
  4. (d) केवल I, III और IV
Answer (c).

उत्तर (c) — केवल I और III। I: 'अ' के बाद विसर्ग और आगे घोष व्यंजन 'भ' — अः का ओ: तपः + भूमि = तपोभूमि (कामताप्रसाद गुरु, हिंदी व्याकरण, वर्ण-विचार, अंक ८१; ch11, भाग S.2)। III: 'अ' के बाद विसर्ग और आगे 'अ' को छोड़ कोई और स्वर हो तो विसर्ग का लोप हो जाता है और फिर संधि नहीं होती: अतः + एव = अतएव (गुरु, अंक ८३; ch11, भाग S.2)। II अशुद्ध है — अत्यंत = अति + अंत (इ + अ = य, यण संधि — गुरु, अंक ६४); 'अत्य' में संधि से बना 'य' ज्यों-का-त्यों रख दिया गया है, जबकि विच्छेद में मूल उपसर्ग 'अति' लौटाया जाता है — और 'अत्य + अंत' से तो दीर्घ संधि होकर 'अत्यांत' बनता। IV अशुद्ध है — महेंद्र = महा + इंद्र (आ + इ = ए, गुण संधि — गुरु, अंक ६२ का उदाहरण); 'मही + इंद्र' से ई + इ = ई होकर 'महींद्र' बनता है — यह उदाहरण गुरु स्वयं दीर्घ संधि (अंक ६१) में देते हैं। (a) यण वाले शब्द का गलत विच्छेद II स्वीकार कर लेता है और III को छोड़ देता है। (b) दोनों अशुद्ध विच्छेदों को ही शुद्ध बताता है — उलटा निर्णय। (d) 'मही + इंद्र' को भी शुद्ध मान लेता है, जबकि उससे 'महींद्र' बनता है।

Q71

नीचे दिए गए वाक्यों पर विचार कीजिए : I. जैसा परिश्रम करोगे, उतना ही फल पाओगे। II. जैसे ही वर्षा रुकी, त्यों ही बच्चे मैदान में खेलने निकल पड़े। उपर्युक्त वाक्यों में कौन-सा/से शुद्ध है/हैं?

  1. (a) केवल I
  2. (b) केवल II
  3. (c) I और II दोनों
  4. (d) न तो I, न ही II
Answer (d).

उत्तर (d) — न तो I, न ही II। नित्य-संबंधी शब्द अपने ही जोड़ीदार के साथ आते हैं: जैसा — वैसा, जितना — उतना, ज्यों ही — त्यों ही, जैसे ही — वैसे ही (कामताप्रसाद गुरु, हिंदी व्याकरण, अंक ७०७, ७१२–७१४ — संबंधवाचक क्रियाविशेषण और उनके नित्य-संबंधी; उदाहरण: "ज्योंही मैं आपको पत्र लिखने लगा, त्योंही आपका पत्र आ पहुँचा"; ch11, भाग Q.5, जहाँ 'जैसा … उतना' को सामान्य अशुद्धि बताया गया है)। वाक्य I में रीति बताने वाले 'जैसा' के साथ परिमाण बताने वाला 'उतना' रख दिया गया है; शुद्ध: "जैसा परिश्रम करोगे, वैसा ही फल पाओगे" या "जितना परिश्रम करोगे, उतना ही फल पाओगे"। वाक्य II में 'जैसे ही' के साथ 'त्यों ही' बेमेल है; शुद्ध: "जैसे ही वर्षा रुकी, वैसे ही बच्चे मैदान में खेलने निकल पड़े" या "ज्यों ही वर्षा रुकी, त्यों ही …"। (a) बेमेल 'जैसा … उतना' वाले वाक्य I को शुद्ध मान लेता है। (b) बेमेल 'जैसे ही … त्यों ही' वाले वाक्य II को शुद्ध मान लेता है। (c) दोनों बेमेल युग्मों को स्वीकार कर लेता है।

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