नीचे दिए गए वाक्यों पर विचार कीजिए : I. उसने मुझे एक सोने की अँगूठी भेंट की। II. ज्यों-ज्यों परीक्षा निकट आई, वैसे-वैसे उसकी चिंता बढ़ती गई। III. वह न केवल कुशल अध्यापक है, अपितु अच्छा लेखक भी है। IV. शृंगार रस को रसराज कहा जाता है। इनमें से कौन-से वाक्य शुद्ध हैं?
- (a) केवल III और IV
- (b) केवल I और II
- (c) केवल II और III
- (d) I, II, III और IV
उत्तर (a) — केवल III और IV। वाक्य III में नित्य-संबंधी युग्म 'न केवल … अपितु … भी' पूरा और सही है (ch11, भाग Q.5)। वाक्य IV सही तथ्य है — शृंगार को रसराज कहा जाता है (ch11, भाग L.2; हिंदी शब्दसागर — रसराज: रसों का राजा, शृंगार रस)। वाक्य I में पदक्रम-दोष है — 'एक' संख्या 'अँगूठी' की है, 'सोने' की नहीं, इसलिए उसे 'अँगूठी' के ठीक पहले आना चाहिए: "उसने मुझे सोने की एक अँगूठी भेंट की" (ch11, भाग K.1, प्रकार 8)। वाक्य II में युग्म बेमेल है — 'ज्यों-ज्यों' का जोड़ीदार 'त्यों-त्यों' है और 'जैसे-जैसे' का 'वैसे-वैसे' (कामताप्रसाद गुरु, हिंदी व्याकरण, अंक ७१३ के उदाहरण: "ज्यों-ज्यों भीजे कामरी, त्यों-त्यों भारी होय"; "जैसे-जैसे आमदनी बढ़ती है वैसे-वैसे खर्च भी बढ़ता जाता है"); ch11, भाग Q.5 में 'ज्यों-ज्यों … वैसे-वैसे' ठीक इसी अशुद्धि के रूप में दिया गया है। शुद्ध: "ज्यों-ज्यों परीक्षा निकट आई, त्यों-त्यों उसकी चिंता बढ़ती गई"। (b) दोनों दोषपूर्ण वाक्यों को शुद्ध और दोनों शुद्ध वाक्यों को अशुद्ध मान लेता है — उलटा निर्णय। (c) बेमेल युग्म वाले II को शुद्ध मानता है और सही तथ्य वाले IV को छोड़ देता है। (d) पदक्रम और युग्म — दोनों दोषों को अनदेखा कर देता है।