सामान्य हिंदी — Hindi Language Skills
कारक, संधि, समास, मुहावरे और वर्तनी — पूरा अध्याय, नि:शुल्क।
60explained questions
10items in the 2022 paper
1chapter
Where candidates lose marks on this
- "श्रृंगार" को शुद्ध मान लेना — शुद्ध रूप शृंगार है (श + ऋ की मात्रा); यही नियम शृंखला पर भी।
- "चिन्ह" और "ब्रम्ह" लिखना — संयुक्ताक्षर में 'ह' पहले आता है: चिह्न, ब्रह्म (वैसे ही: जिह्वा, बाह्य, आह्वान)।
- हर 'से' को करण मान लेना — गिरना/निकलना/डरना/अलग होना हो तो वह अपादान है।
- हर 'को' को कर्म मान लेना — देने का भाव या "के लिए" का अर्थ हो तो संप्रदान।
- नीलकंठ, पीतांबर, चतुर्भुज को कर्मधारय/द्विगु कहना — जब अर्थ शिव/विष्णु (कोई तीसरा) हो, समास बहुव्रीहि है।
- दशानन को द्विगु समझना — संख्या से शुरू होकर भी यह रावण का बोधक है → बहुव्रीहि।
- "उपरोक्त" को शुद्ध मानना — मानक रूप उपर्युक्त (उपरि + उक्त) है।
- "अनेकों", "प्रत्येक छात्रों" जैसे प्रयोग — 'अनेक' स्वयं बहुवचन; 'प्रत्येक/हर' के साथ एकवचन।
- दोहा-सोरठा की मात्राएँ उलट देना — दोहा 13-11; सोरठा 11-13; चौपाई 16-16।
- यमक और श्लेष का घालमेल — शब्द दुहराया जाए (अर्थ बदलते हुए) = यमक; शब्द एक बार आकर अनेक अर्थ दे = श्लेष।
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